रे मन मस्त सदा दिल रहना

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॥ पावन पाठ ॥

रे मन मस्त सदा दिल रहना

आन पड़े सो सहना

रे मन मस्त सदा दिल रहना

कोई दिन कम्बल कोई दिन अम्बर

कबहु दिगंबर सोना

आत्म नशे में देह भुलाकर

साक्षी होकर रहना

रे मन मस्त सदा दिल रहना

कड़वा मीठा सबका सुनना

मुख अमृत बरसाना

समझ सुख दुःख नभ-बादल सम

रंग-संग छुड़ाना

रे मन मस्त सदा दिल रहना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।