जय देवी जय देवी अम्बे पाटना माते

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जय देवी जय देवी अम्बे पाटना माते

पंचारती ओवाडीता प्रसन्न वाटे

सात बहिनी तुम्ही सात गावाच्या

लाडक्या लेकी तुम्ही पुण्यवन्ता चा

आशीर्वादाने तुझ्या ग विघ्ने दूर होती

तुझीया कीर्ति जणू गोडवी गाती

चैत्र पूर्णिमें ला चाले तुझा उत्सव ग

दर्शनाला तुझा नित्य येती वैष्णव

आनंदाने सुहासिनी ओटी ग भरती

माते तुला वरदान सारे मागती

ऊँचती घड़ी वरी तुझा मंदिरी ग

निसर्गाची माया तुझा खेडती राही

पुरिकाच्या कल्यानाची चिंता दूर करावी

जगदम्बे भक्ताची तू माऊली व्हावी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।