सतगुरु सब कुछ तेरे हाथ

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

सतगुरु सब कुछ तेरे हाथ मेरा आज भी तेरा हाथ

मेरा कल भी तेरे हाथ प्रभु जी रखियो मेरी लाज

मेरी आन भी तेरे हाथ मेरी शान भी तेरे हाथ

सतगुरु सब कुछ तेरे हाथ ......

तू चाहे तो भर दे मेरे जीवन में संगीत मेरे,

तू चाहे तो गूंजे हर पल खुशियों के ही गीत हर पल

हर साझ भी तेरे हाथ हर सुर भी तेरे हाथ

गुरु सब कुछ तेरे हाथ..

अपनी जुबा से क्या मैं मांगू सब कुछ जाने तू

मेरे दिल की हर धड़कन में रोम रोम में तू

हर आस भी तेरे हाथ और मुराद भी तेरे हाथ

सतगुरु सब कुछ तेरे हाथ ......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।