नदी किनारे नारियल है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नदी किनारे नारियल है रे नारियल है रे,

ओ म्हारी कालिका माँ ने वास्ते रे

भाई नारियल है रे,

नदी किनारे नारियल है रे भाई नारियल है रे

पहलो यो नारियल नवरंगी रे भाई नवरंगी रे,

हो म्हारी कालिका माँ के वास्ते रे भाई नवरंगी रे,

नदी किनारे नारियल पेड़ भाई भाई नारियल है रे

दूजो यो नारियल नवरंगी रे भाई नवरंगी रे,

हो म्हारी वैष्णव माँ के वास्ते रे नवरंगी रे,

नदी किनारे नारियेरी रे भाई भाई नारियल है रे

तीसरो यो नारियल नवरंगी रे भाई नवरंगी रे,

हो म्हारी अम्बा माँ के वास्ते रे भाई नवरंगी रे,

नदी किनारे नारियेरी रे भाई....

चौथो यो नारियल नवरंगी रे भाई नवरंगी रे

हो म्हारी जगदम्बे माँ के वास्ते रे भाई नवरंगी रे

नदी किनारे नारियेरी रे भाई....

पांचवो यो नारियल नवरंगी रे भाई नवरंगी रे,

हो म्हारी पाटना माँ के वास्ते रे भाई नवरंगी रे

नदी किनारे नारियेरी रे भाई भाई नारियल है रे.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।