कालो की काल महाकाली

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

कालो की काल महाकाली

भवानी माई कलकत्ता वाली

कलकत्ता वाली भवानी माई काली

महिमा तुम्हारी निराली

भवानी माई कलकत्ता वाली

हे अंगारों जैसे नयन लाल लाल

अधरों की लाली गले मुंड माल

जा लम्बी जीभ न काली

भवानी माई कलकत्ता वाली

आगे है हनुमत जी झंडा संभाले

पीछे कुबेर संग भैरव मतवाले

अरे बिच में विकराल रूप वाली

भवानी माई कलकत्ता वाली

दानव दलन करे दुष्टों को मारे

काली की शक्ति जगत जन के तारे

अरे हाथो में भारी भुजाली

भवानी माई कलकत्ता वाली

काली की शक्ति को जिसने भी जाना

मौनी दीवाना हुआ उसका जमाना

दुष्टों से जगत करो खाली

भवानी माई कलकत्ता वाली

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।