प्रेमी कभी यार कभी मेरा बाप बन जाता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

प्रेमी कभी यार कभी मेरा बाप बन जाता

मुझे जिसकी हो दरकारी अपने आप बन जाता

प्रेमी कभी यार .................

मैं सा रे गा नहीं जानू मेरे मा पा हैं मेरे श्याम

सब सुर में ढल जाए वो तोतली जुबां से तेरा नाम

याद कर इसे रोना आलाप बन जाता

मुझे जिसकी हो दरकारी अपने आप बन जाता

तेरे दर जा सब पूजे घर में ना रखें तस्वीर

जो घर तेरा दिया है बैठा है तू मेरी तक़दीर

आते जाते देख तुझे हर ताप छन जाता

मुझे जिसकी हो दरकारी अपने आप बन जाता

जग से ना कोई अभिलाषा एक तुमसे ही मेरी आस

मैं कितना भी बदलू तुम रहना रखना सदा पास

बाकी सब अच्छा है जो तू आप बनवाता

मुझे जिसकी हो दरकारी अपने आप बन जाता

प्रेमी कभी यार .................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।