अपने ही मन से राम को भुलाय के

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

अपने ही मन से राम को भुलाय के

सजा पइहो मनवा हरी विश्राय के

गर्भ में पहिले कौल करि आयए

यहाँ पर आके प्रभु को भुलाये

गर्भ में पहिले कौल करि आयए

यहाँ पर आके प्रभु को भुलाये

भूल गइले प्राणी प्रभु को माया में फसाय के

सजा पइहो मनवा हरी विश्राय के

स्वास का पंछी जबहि उड़ जइहै

तो खली पिजरा परा रही जइहै

स्वास का पंछी जबहि उड़ जइहै

तो खली पिजरा परा रही जइहै

ले जावे घरके तेरे कंधे पे उठाय के

सजा पइहो मनवा हरी विश्राय के

लकडिया चुन-चुन सेज सजवहय

ताहि पे तुहका ढंग से लेटाइहय

लकडिया चुन-चुन सेज सजवहय

ताहि पे तुहका ढंग से लेटाइहय

फूक देइहय देहिया तोहरी अगिया लगाय के

सजा पइहो मनवा हरी विश्राय के

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।