हरि का भजन करा भाई हो बीत जाला उमरिया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हरि का भजन करा भाई हो बीत जाला उमरिया

जाला उमरिया बीत जाला उमरिया

हरि का भजन करा भाई हो बीत जाला उमरिया

माता पुत्र पिता आरभंगी

यही सब है मतलब के संगी

कोई साथ नहीं जाई रे

हे कोई साथ नहीं जाई हो

बीत जाला उमरिया.....

एहि तन को तुम मलि मलि धोयो

तन को धोयो मगर मन नहीं धोयो

ये काया अग्नि बीच जलजाइ हो

हो अग्नि बीच जलजाइ हो

बीत जाला उमरिया....

पूछे लोग आप है कैसे

जबतक पास तुम्हारे पैसे

साथ नहीं जब पाई हो

बीत जाला उमरिया.....

कहत सुरेश जतन कुछ करलो

प्रभु से मिलने का जतन तुम करलो

राम नाम संग जाई हो

बीत जाला उमरिया.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।