मां का आशिर्वाद जग में चारो धाम से न्यारा हैं

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॥ पावन पाठ ॥

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं,

मां हैं तो हर सहारा है,

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं ॥

हमको जनम देकर, उपकार किया मां ने, हैं मां का कर्ज बड़ा,

मां की चरण सेवा करते रहे नित हम, हमारा ये फ़र्ज़ बड़ा ।

जन्मी के जैसा तो,

जन्मी के जैसा तो, कोई और ना हमको प्यारा हैं ॥

मां हैं तो हर सहारा है,

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं ॥

उंगली पकड़कर के, चलना सिखाती मां, सिखाती बोलना,

आंचल की छैय्या में, हमको सुलाती मां, सुनाकर लोरिया ।

बच्चों के लिए मां ने,

बच्चों के लिए मां ने, अपना सारा जीवन वारा है ॥

मां हैं तो हर सहारा है,

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं ॥

बच्चों की आंखों में आ जाये आंसू तो, मां भी रोती हैं,

पुचकार कर हमको, सीने से लगाये जो, वो मां ही होती हैं ।

मां के कलेजे का,

मां के कलेजे का, टुकड़ा बच्चा आंख का तारा हैं,

मां हैं तो हर सहारा है,

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं ॥

देती हैं बच्चों को, संस्कार जीने का, कर्मो का ज्ञान भी,

मां की दुवाओं से बनती हैं तकदीरें, मिलता हैं मान भी ।

चोखानी जन्मी की,

चोखानी जन्मी की, महिमा गाता ये जग सारा हैं ॥

मां हैं तो हर सहारा है,

मां का आशीर्वाद जग, चारो धाम से न्यारा हैं ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।