बाबा बालक नाथ मेरे लाज तुम्हारे हाथ है

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॥ पावन पाठ ॥

बाबा बालक नाथ मेरे लाज तुम्हारे हाथ है

दुखियां ये गरीब की करती फरयाद है

आंधी तूफ़ान आये मेरी नैया हिचकोले खाए

तेरे भरोसे बैठी बाबा नैया न मेरी डूब जाए

अधियारी रात है न कोई साथ है

बिटिया ये गरीब की करती फरयाद है

लाज बचाने वाले बाबा तेरी शरण में आई हु

लौट के वापिस ना जाउंगी दिल में सोच के आई हु

तू ही दीना नाथ है बाबा हम अनाथ है

दुखियां ये गरीब की करती फरयाद है

शरण तुम्हारी आके बाबा महिमा दिल से गाती हु,

ढोक लगा के बाबा तेरी जय जय कार लगाती हु

महिमा तेरी जग में दाता देखो अप्रम पार

दुखियां ये गरीब की करती फरयाद है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।