बिसर गयी सुद रही न तन की

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

बिसर गयी सुद रही न तन की होए री मैं तो मर गई

राधा बल्लव की अखियाँ जादू कर गई

मोटी मोटी अखियो में जीना जीना कजरा

कजरे की गोर खिसक गई

राधा बल्लव की अखियाँ जादू कर गई

राधा बलव की चितवन निराली

चितवन प्रेम में मर गई

राधा बल्लव की अखियाँ जादू कर गई

दर्शन करके मैं भई रे वन्वारियां

जानकी दिल में वस् गई

राधा बल्लव की अखियाँ जादू कर गई

जब से सांवरियां से अखियाँ लड़ाई,

अखियाँ लड़ाई हाय अखियाँ लड़ाई

अखियाँ घ्याल कर गई

राधा बल्लव की अखियाँ जादू कर गई

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।