सूर्य देव का वार है

पारंपरिक
सूर्य देव भजन विविध भजन surya
॥ पावन पाठ ॥

सूर्य देव का वार है उर्जा का संचार है

रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है

सूर्य देव का वार है

सूर्ये देव का रथ चलता है तो जन जीवन चलता है

पाके ऊष्मा सूर्ये देव की धरा का आँचल खिलता है

यही सूर्य का सार है उर्जा का संचार है

रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है

सूर्य देव का वार है

प्राहते काल की नर्म लाली माँ सूर्ये देव जब लाते है,

जन जीवन जागृत होता पंशी गुण गुण गाते है

धरती का शिंगार है उर्जा का संचार है

रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है

सूर्य देव का वार है

सूर्ये देव का जो प्रति दिन पूजन वन्दन करता है,

नियमत करे अश्नान ध्यान जो रवि अभिनंद करता है

कटता रोग विकार है उर्जा का संचार है

उर्जा का संचार है

रवि वार दिन सूर्ये देव का पूज रहा संसार है

सूर्य देव का वार है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।