रे मनवा प्रेम जगत का सार

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

रे मनवा प्रेम जगत का सार,

प्रेम पुजारिन राधे रानी कृष्ण प्रेम अवतार,

रे मनवा प्रेम जगत का सार....

प्रेम की मुरली, प्रेम की जमुना,

प्रेम ही राधे, प्रेम ही कृष्णा,

एक दूजे के ये अनुरागी,

सब में जगायें प्रेम की तृष्णा,

प्रेम में डूबे प्राण करत हैं,

प्रेम की जय जयकार,

रे मनवा प्रेम जगत का सार...

प्रेम डगर पर चलते चलते,

भक्ति की पावन नदिया आये,

भक्ति की नदिया बहते-बहते,

प्रेम के सागर में मिल जाये,

भक्ति के दोनो ओर प्रेम है,

भक्त खड़े मझधार,

रे मनवा प्रेम जगत का सार...

रे मनवा प्रेम जगत का सार,

प्रेम पुजारिन राधे रानी कृष्ण प्रेम अवतार,

रे मनवा प्रेम जगत का सार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।