हे दीनबंधु दयालु तू

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॥ पावन पाठ ॥

हे दीनबंधु दयालु प्रभु तू गरीब नवाज है

तेरे सिवा मेरा नहीं प्रभु हमको तुम पर नाज है

हर श्वास धड़कन में तू ही विद्वान वेदों ने कही

यह बात बिल्कुल है सही कण कण में तेरा राज है

निर्धन का धन निर्बल का बल दुखियों का तू आधार है

तू है बादशाह का बादशाह तेरे हाथ में मेरी लाज है

किससे कहूं और कौन सुने वह कौन सा दरबार है

यह दरस है मेरा वास्ता तु सबके सिर का ताज है

आदि मध्य और अंत में त्रिकाल तेरा आसरा गिरधर

कहे गोविंद मेरा तू ही साज और तू ही आवाज है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।