आज गौरा ते शिव दा विआह

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

आज गौरा ते शिव दा विआह

शिव दूल्हा बनिया है

बनके बाराती आज भरमा जी आये ने

भरमा जी आये ने भरमाणी नु ले आये ने

उंहा दोवा दे फेरे दित्ते करा

शिव दूल्हा...........

बनके बाराती आज विष्णु जी आये ने

विष्णु जी आये ने लष्मी नु ले आये ने

गौरा रानी नु दित्ता है विआह

शिव दूल्हा............

बनके बाराती आज श्याम जी आये ने

श्याम जी आये ने राधा जी नु ले आये ने

मेरे श्याम तू बंसी बजा

शिव दूल्हा............

बनके बाराती आज शेरावाली आयी है

शेरावाली आयी है भगता नु ले आयी है

भगता नु चड्या है चा

शिव दूल्हा..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।