मरना है तो एक बार मरो

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

मरना है तो एक बार मरो फिर चौरासी में पड़ना क्या,

हर बार का मरना मरना क्या ....

करके भजन मन निर्मल करलो,

ध्यान प्रभु का हर पल करलो,

भीतर के जब मेल ना धोए,

बाहर रूप संवरना क्या,

हर बार का मरना मरना क्या....

भला बुरा का ज्ञान रहेगा,

परमेश्वर फिर साथ रहेगा,

जब रघुनाथ का हाथ हो सर पे,

फिर है किसी से डरना क्या,

हर बार का मरना मरना क्या.....

कटु वचन भी सहना पड़ेगा,

राह कठिन है चलना पड़ेगा,

श्याम प्रेम में पागल हुआ तो,

फिर पापों से डरना क्या,

हर बार का मरना मरना क्या.....

नेक कर्म बिन जनम बिताना,

उसका भी जीना है क्या जीना,

भक्ति के मोती चुन ना सके फणि,

ख़ाक से झोली भरना क्या,

हर बार का मरना मरना क्या.....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।