भक्ति दान गुरू दीजिए

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॥ पावन पाठ ॥

भक्ति दान गुरू दीजिए,

देवन के देवा हो ll

जन्म पाया न बिसरूं,

करिहूँ पद सेवा ll

तीरथ वर्त मैं न करूँ,

ना देवल पूजा ll

मनसा वाचा करमणा,

मेरे और ना दूजा ll

भक्ति दान गुरू,,,,,,,,

अष्ट सिद्धि नौ निधि है,

बैकुण्ठ का वासा ll

सो मैं कुछ ना माँगता,

मेरे समर्थ दाता ll

भक्ति दान गुरू,,,,,,,,

सुख, सम्पति, परिवार, धन,

सुंदर वर नारी l

सुपने में इच्छा न उठे,

गुरू आन तुम्हारी ll

भक्ति दान गुरू,,,,,,,,

धर्मदास की विनती,

समर्थ सुन लीजै ll

आवागमन निवार कै,

अपना कर लीजै ll

भक्ति दान गुरू,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।