मन नेकी कर ले

संत कबीर
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मन नेकी कर ले, दो दिन का मेहमान xll

दो दिन का मेहमान,,,

मन नेकी कर ले, दो दिन का मेहमान xll

जोरु लड़का, कुटम्ब कबीला,

दो दिन का, तन मन का मेला ll

अंत काल हँस, जाए अकेला,

तज माया मंडाण,,,

मन नेकी कर ले,,,,,,,,,,,,,,,,,

कहाँ से आया, कहाँ जाएगा,

तन छूट मन, कहाँ समाएगा ll

आखिर तुझको, कौन कहेगा,

गुरु बिना आत्मज्ञान,,,

मन नेकी कर ले,,,,,,,,,,,,,,,,,

कौन तुम्हारा, सच्चा साईं,

झूठी है यह, जग हंसनाई ll

कौन ठिकाना, है तेरा भाई,

क्या बस्ती क्या नाम,,,

मन नेकी कर ले,,,,,,,,,,,,,,,,,

रहत माल, कूप जो भरता,

आवत जावत, भरा वो रीता ll

युगों युगों से, मरता जीता,

क्यों करता अभिमान,,,

मन नेकी कर ले,,,,,,,,,,,,,,,,

लख चौरासी, भोगे तासा,

ऊँच नीच घर, लेता वासा ll

कहत कबीर, सुनो भाई साधो,

ले ले गुरु का नाम,,,

मन नेकी कर ले,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।