मोहे चाकर बना कर रखलो कालका माता जी

पारंपरिक
श्री राम भजन दुर्गा भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

तेरी किरपा से हे माता जीती प्रभु राम ने लंका

तीनो लोक चहू बहु भवन में बाजे तेरा डंका

मोहे चाकर बना कर रखलो कालका माता जी

साडी बनारस से हु लाइ

जयपुर से लेहंगा मंगवाई

सिंदूर भी बंगाल से आया चंडीगड चुडा है लाया

मैया जी के हाथो में चूड़ी लाल लाल है

टिका है लाल लाल चुनरी भी लाल है

लाल तेरी किरपा से मालामाल

मोहे चाकर बना कर रखलो कालका माता जी

बाल न बांका होए लाल का

आये जो दरबार कालका

पूरण हर मनोकामना करदे सब की खाली झोलियाँ भर दी

बाबा बालक नाथ जी पे रिजी भवानी

किरपा हुई दिल्ली पे बनी राज धानी

माता कालका से हारे मुग़ल अभिमानी

मोहे चाकर बना कर रखलो कालका माता जी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।