मेरी उम्मीद का दीपक कभी बुजने नही देना

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरी उम्मीद का दीपक कभी बुजने नही देना

श्याम जो तुम से पाया है कभी लुटने नही देना

मैं सच की राह पर चल कर जाऊ गी अपनी मंजिल पर,

दया क्या ये कम है ओ घनश्याम प्यारे

जो चरणों में तेरे ठिकाना मिला है

बड़े भाग्यशाली है वो तेरे बंदे जिहने आप से दिल लगाना मिला है

मुरारी मैं रेहमत के सदके तुम्हारी जो चरणों में ये सिर झुकाना मिला है

वो क्या भागे जन्नत की परवाह करेगे जिहने आप का आशियाना मिला है

मैं सच की राह पर चल कर जाऊ गी अपनी मंजिल पर,

झूठ के आगे मेरा सिर कभी झुकने नही देना

मैं जब भी ठोकरे खाऊ सहारा आप का पाऊ,

आसारा इस जहां का मिले न मिले

मुझे तेरा सहारा सदा चाहिए

चाँद तारे फलक पर दिखे न दिखे मुझको तेरा नजारा सदा चाहिए

मेरी धीमी है चाल और पथ है विशाल हर कदम पर मुसीबत है अब तू स्म्बाल

पैर मेरे थके है चले न चले मुझको तेरा सहारा सदा चाहिए

मैं जब भी ठोकरे खाऊ सहारा आप का पाऊ,

भगती की राह में मुझको कभी रुकने नही देना

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।