हे प्रित्पाली लाटा वाली मेहर करो महामाया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

दुनिया दा ठुकराया हो या शरण तिहारी आया

हे प्रित्पाली लाटा वाली मेहर करो महामाया

बेडी विच मजधार फसी है डोले जींद निमानी

जिस पासे भी चाती पावा सो सो करदा पानी

चंदा रूप भयानक सारे देख के दिल गबराया

हे प्रित्पाली लाटा वाली मेहर करो महामाया

मैं ओ फुल जो दानो टुटा जे न पूरा खिलेया,

ऐसा केहर समय ने किती मिटटी दे विच मिलिया

पैरा हेठ मचोल के दुनिया बेडा हाल बनाया

हे प्रित्पाली लाटा वाली मेहर करो महामाया

तेरे बिन कोई था न मेरी दुनिया वेखी वाली

चन अपने दी बिगड़ी बना दे बिगड़ी बनावन वाली

इस बेदर्द जमाने कोलो दिल मेरा उताया,

हे प्रित्पाली लाटा वाली मेहर करो महामाया

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।