हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

पारंपरिक
माता दुर्गा कथा दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

शरणा तेरा है ओ शरणा तेरा है

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

ओ शरणा तेरा है आसरा तेरा है

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

मैया है ब्रह्मा की पुत्री लेकर ज्ञान स्वर्ग से उतरी -

ओ आज थारी कथा बना दुयु सुथरी प्रथम मनाया है -2

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

ओ शरणा तेरा है आसरा तेरा है

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

मैया तेरा भवन बड़ा जाली का हर गूथ लाया है माली का

ओ धयान धार कलकत्ते वाली का पुष्प चढ़ाया है -2

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

मैया तूने महिसासुर को मारा अपने बल के धरण पछाडया

ओ हाथ लिए खांडा रू दारा असुर सहारा -२

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

ओ शरणा तेरा है आसरा तेरा है

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

कहता शंकर जटिली वाला हरदम रत मैया की माला

ओ खल तेरे हिरदय का ताला विद्याधर पाया है -२

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

ओ शरणा तेरा है आसरा तेरा है

हे मंगल की मूल भवानी शरणा तेरा है

बोलो नाथ जी महाराज की जय

रति नाथ जी भजन

धीरेन्द्र शर्मा ९९८२०१३८२८

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।