सानू चिठी पाई होइ ऐ

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

उचिया पहाड़ा ऊते रहन वालिये

सुनया तू सानू चिठी पाई होई ऐ

आवंगा जरूर तेरे दर दातिये

मन विच लग्न लगाई होई ऐ

सोन दा महीना पैंदी भूर दातिये

भगता नु रहन्दी ऐ उडीक दातिये

असां वी ता औना ऐ जरूर दातिये

मन विच लग्न लगाई होई ऐ

दर तेरे ऊते मइया ऑन टोलिया

नाम तेरा ले ले मइया पौन बोलिया

असां वी ता औना ऐ जरूर दातिये

मन विच लग्न लगाई होई ऐ

सुनया ऐ दाती भगता नु तार दी

सार आज ले ले अपने तू लाल दी

असां वी ता दुखड़ा सुनना दातिये

मन विच लग्न लगाई होई ऐ

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।