हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

बालक सी मैं व्याह करवाया तेरे संग मैं व्याही हो

पीहर छोड़ सासरे आ गी ल्यादी कुल कशाही हो,

धोवे अकेली मीरा

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

रोम रोम में रम्या होया से नही रोम से न्यारा हो

दुष्टों का संगार करा तने बन भगतो का प्यारा हो,

हो जंग जावे अकेली मीरा

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

आदम देह के चोले के संग दूत रहे सयम के हो

सतरंग सहज बिछा राखी से लगे गलीचे गम के हो

सोवे अकेली मीरा

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

मांगे राम राम ने टोहवे कोना पावे दर पे हो

लखमी चंद सुरग में जा लिए फिर भी भोजा सिर पे हो

रोवे अकेली मीरा

हो आजा नन्द के दुलारे रोवे अकेली मीरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।