दूर कही तन्हाई में जब दिल ये रोता है

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॥ पावन पाठ ॥

दूर कही तन्हाई में जब दिल ये रोता है

तू मेरे साथ साथ बाबा साथ साथ होता है

ऐसा लगता है जैसे तूम मुझको देते दिलासा

तुम से मुझको प्यार मिला इस जग ने दी है निराशा

भोज दुखो में मेरे बाबा तू ही ढोता है

तू मेरे साथ साथ बाबा साथ साथ होता है

मेरे अनसु सदा तुम्हारे चरणों को ही पखारे गे

मेरे नैना आजीवन तक बाबा तुम्हे निहारेगे

तू ही मेरी सांसो में बाबा हर दम होता है

तू मेरे साथ साथ बाबा साथ साथ होता है

मुझको पत्थर केह के साईं ठोकर मारी है जग ने

संग में जिनके मैंने सजाये थे जीवन के सपने

रिश्ता बस तेरा ही सचा बाकी धोखा है

तू मेरे साथ साथ बाबा साथ साथ होता है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।