तेरे दर से माँ इतना मिला

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे दर से माँ इतना मिला मेरा परिवार तूम से पला

अब रहा न माँ कोई गिला फूल मन का तुझी से खिला

मेरा कोई नही था सहारा मैंने दुखडो में जीवन गुजारा,

तेरी किरपा का जादू चला दाग किस्मत का मेरा धुला

अब रहा न माँ कोई गिला फूल मन का तुझी से खिला

हाल दिल का माँ जिसे सुनाया मुझे पल में उसी ने भुलाया

साथ जब से माँ तेरा मिला टल गई है मेरी हर बला

अब रहा न माँ कोई गिला फूल मन का तुझी से खिला

लोग रोके माँ सुनते कहानी और हस्ते उड़ाते भवानी

क्या बताऊ तुझे मैं भला जो मिला उस ने मुझको छला,

अब रहा न माँ कोई गिला फूल मन का तुझी से खिला

हर्ष तेरी शरण में जो आया जो न सोचा था वो तुम से पाया

मन का दीपक तुझी से जला दिया भगती का तुमने सिला

अब रहा न माँ कोई गिला फूल मन का तुझी से खिला

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।