बम बम बोल रहे जयकारे

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हे बम बम बोल रहे जयकारे गंगा तट पे देखे नजारे

गंगा जल के भर के जा रे चले कवाडिया सारे

के बम बम बोल रहे जयकारे

शीतल जल ये मन में समाया

माथे तिलक चंदन लगाया

बन के पुजारी कावड उठाया

गंगा माँ को काँधे सजाया

ॐ नाम का जाप भज के चले है शिव के द्वारे

के बम बम बोल रहे जयकारे

शिव दीवानों से प्यार से मिलना

यहा मिले तो हस के खिलना

नशा है नाम का थोडा झुकना

करने दर्शन जरा तो रुकना

भूतो की बारात चली है सब हो रहे लाल और काले

के बम बम बोल रहे जयकारे

अंग भभूती गोरा ओर काला भगवा वस्त्र कमली वाला

पाओ घुंगरू हो मत वाला नाचे झूमे शिव रखवाला

तेरी फौजे करती है मौजे रंग मस्ती में है सारे

के बम बम बोल रहे जयकारे

भांग धतुरा चन्दन चड़ाये बेल पत्तर धुशाला उडाये

आँख जेन्यु पुष्प सजाये रजत चंदरमाँ मस्तक लगाये

सर्पो की गले माला लिपटे शिव सजन देखे नजारे

के बम बम बोल रहे जयकारे

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।