किसी का रहा नहीं अभिमान

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॥ पावन पाठ ॥

आसमान पर उड़ने वाले धरती को पहचान,

किसी का रहा नहीं अभिमान,

ये संसार सभी नश्वर है फिर कैसा अभिमान ,

छोड़ के ये जगवा भी चल दिए जो थे वीर बलवान ,

किसी का रहा नहीं अभिमान,

धन दौलत का मान बुरा है कहते वेद पुराण,

अभिमानी रावण को देखो मिट गया नामो निशाँ,

किसी का रहा नहीं अभिमान,

तीर्थ मंदिर मंदिर ढूंढा गया न इतना ध्यान,

हर दिल में भगवान वसा है हो सके तो पहचान,

किसी का रहा नहीं अभिमान,

सदा यहाँ नहीं रहना तुझको रहना है दिन चार,

इंसान से नफरत क्यों करता तू भी इक इंसान,

किसी का रहा नहीं अभिमान,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।