जीवन बदल गया प्रभु का दामन थाम कर

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॥ पावन पाठ ॥

जीवन बदल गया प्रभु का दामन थाम कर

हर सांस अपनी करदी बस उसके नाम पर,

जीवन बदल गया प्रभु का दामन थाम कर

क्या खोया क्या पाया क्या संजोये अपने पास ,

मन ये प्रभु का हो गया बस यही है एहसास

मंगल ही मंगल है अब तो अपने मुकाम पर,

जीवन बदल गया प्रभु का दामन थाम कर

मैं परिंदा नील गगगन का प्रभु ही मेरा है ठिकाना,

सुख देना मेरा धर्म है प्रभु से मैंने है जाना,

चला है यही कारवा जीवन के आया मकन,

जीवन बदल गया प्रभु का दामन थाम कर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।