आ दरश दिखा दे गुरुदेव तुझे तेरे लाल बुलाते

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॥ पावन पाठ ॥

आ दरश दिखा दे गुरुदेव तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे गुरुदेव

आँखों के आंसू सुख चुके है अब तो दर्श दिखा दे,

कब से खड़े है दर पर तेरे मन की तू प्यास बुजा दे ,

तेरी लीला निराली गुरु देव तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे गुरुदेव

बीच भवर में नैया पड़ी है आकर तू पार लगादे,

तेरे सिवा मेरा कोई नहीं है आकर गले से लगा ले,

क्यों देर लगाते गुरु देव तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे गुरुदेव

डूभ रहा है सुख का ये सूरज गम की बदरिया है छाई,

उजड़ गई बगियन जीवन की मन की काली मुरझाई,

करे विनती ये बालक राज,तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे गुरुदेव

वैसे तो तुम हो मन में हमारे आंखे नहीं मान ती है

इक पल गुरु से ये अब बिछुड़ दर रहना नहीं चाहती है,

भर बरसाए नीर तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे तेरे लाल बुलाते है,

तुझे रो रो पुकारे मेरे नैन तुझे तेरे लाल बुलाते है,

आ दरश दिखा दे गुरुदेव

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।