मिठियां मुरादा माँ तो पौन दी एह रात है

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मिठियां मुरादा माँ तो पौन दी एह रात है

सुते होए भागा नु ज्गोन दी रात ऐ

गुण मेहरावाल्ड़ी दे गौन दी रात ऐ

सचे दिलो आस रख जेह्ड़े बेहन गे

ओहना झोली रेहमता दे हीरे पल्ले पैन गे

प्यार नाल सिर दी झुकोन दी एह रात ऐ

मने गी स्वालियाँ दी हर इक गल माँ

शरदा दे बूटियाँ नु ला देवेगी फल माँ

दुःख महारानी नु सुनोन दी एह रात ऐ,

ऐथे निर्दोष अज सुनेगी माँ सब दी

एसी केहड़ी रेहमत जो एथो नही ल्भ्दी

भावना दा पलड़ा फेलाउन दी रात ऐ,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।