खुल गये ने मुक्दरा दे ताले

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

खुल गये ने मुक्दरा दे ताले जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

बदल उड़े ने मुसीबता दे काले जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

सुकियाँ ने वेला फिर हो गईया हरियां

भवर चोगाथ हेनी वेह्डीया ने तरियां,

औखे दिन माये होए ने सुखाले

जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

रुकी होई गद्दी फिर चली कमा काज दी

सुधरी जिन्दगी माँ हर मोहताज दी,

सुख झोली पये रुख गये टाले,

जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

जो सी दूरियां मसा होईया पुरिया

खंभ लाके उड़ गईया सबे मजबूरियां

जगह ख़ुशी दे किया माँ निराले जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

दुरो दलिजा तेरे दर दिया मलिया

दितियाँ जदो निर्दोष माँ तसलियाँ

भूल गए साहणु पैरी पई छाले

जदों दा तेरा नाम ज्पेया,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।