ऐसी करुणा करो किशोरी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

ऐसी करुणा करो किशोरी जाने या अनजाने में

वृंदावन में उम्र कटे और मौज मिले बरसाने में

ऐसी करुणा करो किशोरी

जीवन के पथ में अंधियारा मैंने अपने आप किया

काम क्रोध लालच में आकर हर पल मैंने पाप किया

उम्र कैद की सजा सूना दो पापो के हर जाने में

ऐसी करुणा करो किशोरी

अपनों ने संग छोड़ दिया है गैरो की अब आस नही

एक तुम्हारे सिवा किशोरी कुछ भी मेरे पास नही,

दर दर मारा भटक रहा हु इस बेदर्द जमाने में

ऐसी करुणा करो किशोरी

श्री हरिदास की प्यारी तुम हो करुना मई कहाती हो

दीन दुखी जो है दुनिया में उनका साथ निभाती हो

कहे अनाडी क्या दिकत है खत्री को अपनाने में

ऐसी करुणा करो किशोरी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।