मन तू सतसंग करले भाई

संत कबीर
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

मन तू सतसंग करले भाई आधी मे पुनिआध,

तुलसी सतसंग साध कि भाई कटे कोटि अपराध,

मन तू सतसंग करले भाई,

सतसंग बीना सुख नही पावै,

चाहै फिरो जग माई......

सतसंग पारस है जग माई कंचन करै सदाई,

मन पलट हरि मे लागो सारो दुःख मिट जाई,

सतसंग है सत्य कि करणी भव से पार उतराई,

जो कोई आई बेटे सतसंग में प्रभु के दर्शन हो जाई,

सतसंग पाई सारा सुधरिया कबीरा सज्जन कसाई,

पल मे मोक्ष करे जीव कि यामे शिंष्य नाय,

देवा राम मिल्या गूरू पुरा सतसंग लगन लगाई,

गणपत राम करो नीत सतसंग जन्म सफल हो जाई.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।