साईं जी आ जाओ

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॥ पावन पाठ ॥

जख्मो दिलो के आज किसी को दीखते नही

दुआओं में भी प्राण किसी के बचते नही

हुनी पे अगर आज जो आये और जबा

एसी घड़ी में साईं जी आ जाओ याहा

थालो सजी है पूजा की पर भक्ति नही,

सच केहने की आज किसी में शक्ति नही

चारो और है झूठ का धुँआ धुँआ

एसी घड़ी में बाबा जी आ जाओ याहा

बेजुबान हु कलम से ही कह पाउगा मैं,

इन भक्तो के पीछे नही रेह पाउगा मैं

दोस्त बन के जो दे रहे मुझे दगा,

एसी घड़ी में साईं जी आ जाओ याहा

गुनागार को आज सजा मिलती नही,

रेहम की रोनक किसी चेहरे पर दिखती नही

इंसान तेरी इंसानियत भी हुई जुदा

एसी घड़ी में साईं जी आ जाओ याहा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।