तेरे दर्शन को गणराजा

पारंपरिक
श्री गणेश भजन गणेश भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

( नसीब वाला वोह है गणराजा, तेरा दीदार होता है,

जिस पे होता है तेरा, नज़र-ए-कर्म,

उसका बेड़ा, पार होता है ll )

तेरे दर्शन को गणराजा, तेरे दरबार आए हैं ll

तेरे दरबार आए हैं, तेरे दरबार आए हैं,

तेरे दर्शन,,जय हो lll को गणराजा, तेरे दरबार आए हैं ll

सुना है मैंने गणराजा, तुम्हें लडडू ही भाते हैं ll

तुम्हारे भोग में भगवन, हाँ लडडू साथ लाए हैं l

तेरे दर्शन को गणराजा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम्हें दूर्वा सदा चढ़ती, लोग ऐसा सदा करते ll

बेल पत्ती के संग संग में, हाँ दूर्वा हार लाए हैं l

तेरे दर्शन को गणराजा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

तुम्हें वस्त्रों में पिताम्बर, पहनते हमने देखा है ll

कि दर्ज़ी से भी सिलवाकर, तुम्हारे वस्त्र लाए हैं l

तेरे दर्शन को गणराजा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*सुना है ताज़े फूलों के, तुम्हें गज़रे सुहाते हैं ll

कि बागों से 'सुमन योगी', सुगंधित फूल लाए हैं l

तेरे दर्शन को गणराजा,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।