न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है

पारंपरिक
हनुमान जी भजन हनुमान भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

बजरंग के चरणों में इक फूल चडाना है

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

तुम बाल समय में प्रभु,

सूरज को निगल डाले

अभिमाने सुरपति के सब दर्प मसल डाले

बजरंग हुए तब से संसार ने जाना है

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

सब दुर्ग ढहां कर के लंका को जलाए तुम

सीता की खबर लाये

लक्ष्मण को बचाए तुम

प्रिये भरत सरिस तुम्हे श्री राम ने माना है

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

जब राम नाम तुमने पाया न नगीने में,

तुम फाड़ दिए सीना सिया राम एक सीने में

विस्मित जग ने देखा कपि राम दीवाना है

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

हे अजर अमर स्वामी तुम हो अंतर यामी

ये दींन हीन चंचल अभिमानी अज्ञानी

तुम ने जो नजर फेरी फिर कौन ठिकाना है

न स्वर है न सरगम है न लय न तराना है,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।