मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग

पारंपरिक
अन्य भजन बाबा बालक नाथ भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

चढ़ गया मेरे उते मेरे नाथ वाला रंग

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

देखो मेनू बाबा जी ने कीने रंगा विच रांगेया,

सब कुछ दिता मेरे नाथ ने जो भी उस तो मंगेया,

मैं ता बन गई हां जोगी दी मलंग

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

उचे असमाना दे उड़ दी नु मेनू बाबा तुनके मारे

जे मैं कटी जावा जोगियां तेरे डिगा द्वारे

मैनु गुफा ते बुलाई रहू तेरे ही संग

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

तेरे नाम दी मस्ती एसी मेनू बुल गए शाम सवेरे

होर कोई नही वसदा मेरी रूह ते उसदे डेरे,

खड़ी खुल खेल दिति साहणु रखेया न तंग

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

ओहदे हथा दे विच हूँ ता मेरे साहा दिया डोरा,

ओहदे हुकम नल जिन्गदी चलदी वे मैं सब कुछ आगे तोरा

जोगी दसे संदीप नु जून वाले ढंग

मेनू बाबा ही उडावे मैं बाबे दी पतंग,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।