शरण में तुम्हारी हम आये मुरारी

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

शरण में तुम्हारी हम आये मुरारी,

प्रभु दिन दुखियो के रकच्छक तुम्ही हो,

दया हमपे करदो मैं हु भिखारी,

पंछी को डाल से कुछभी प्यारा नही,

पिंजड़ा सोने का हो फिर भी गवारा नही,

वही हाल मेरा चरण राज हु तेरा,

चरण में ही रखलो है बिनती हमारी,

कितनी आंधी चली कितने तूफा सहे,

पर किसी से कभी कुछ ना मन की कहे,

सिवा तेरे दुनिया मे है कौन मेरा,

जो हरलेता थोड़ी सी बिपदा हमारी,

नाथ मुझको अगर आप ठुकरायेंगे,

हम अकेला कहा कैसे रह पाएंगे,

भुला करके तुझको जिये कैसे प्यासा,

है भगवान मेरा तू। मैं हु पुजारी,

सरन में तुम्हारी। हम आये मुरारी,

H K J PYASA 9831228059

हेमकांत झा प्यासा 8789219298

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।