सुन सांवरे तुमको कब से पुकारे रे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

सुन सांवरे तुमको कब से पुकारे रे

नैना भी म्हारे प्यारे रो रो के हारे रे

सुन सांवरे ...........

अपनी ही उलझनों में उलझ हम आये रे

मिलते ही नैन तुमसे कुछ ना कह पाए रे

अँखियों से बरसे मोती दर पे तुम्हारे रे

सुन सांवरे ...........

दुखियों की भीड़ दर पे रहे दिन रात है

जाने है तू तो हर एक दिल की रे बात है

भीगी हैं पलकें सबकी तुमको निहारे रे

सुन सांवरे ...........

बांकी है चितवन तेरी बांके हैं नैन हैं

मिलके भी तुमसे बाबा रहते बेचैन हैं

करते हियँ घायल तेरे नैन कजरारे रे

सुन सांवरे ...........

कृपा हो जाए तेरी विनती हमारी है

भक्तों में तेरे नहीं गिनती हमारी है

कहता ना झूठ जालान चाहे तू बिसारे रे

सुन सांवरे ...........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।