भजन कम शोर है

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॥ पावन पाठ ॥

भजन कम शोर है ज्यादा कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में,

स्वर ईश्वर में ना भेद कोई है,

सामवेद जैसा नहीं वेद कोई है,

अच्छा नहीं कर सको तो बुरा ना करो,

गीत संगीत को बेसुरा ना करो,

भजन कम शोर हैं ज्यादा कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में....

दिल नहीं हिले तो संगीत नहीं है,

मन को जो छुए नहीं गीत नहीं है,

पहले अंग्रेज आके मैला किया है,

बचा कुचा जो था उसे छैला किया है,

भजन कम शोर हैं ज्यादा कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में..

स्वर नहीं साधे है तो रुदन ना करो,

गीत संगीत से प्रदुषण ना करो,

नाम चाहिए तो अच्छा नाम करो रे,

बच्चे कुछ सीखे ऐसा काम करो रे,

भजन कम शोर हैं ज्यादा कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में....

गाली देके नाम किया नाम कोई है,

करता है कोई बदनाम कोई है,

सीडी देख के आज विष घोल रहा है,

बच्चा बच्चा ढीला जींस खोल रहा है,

भजन कम शोर हैं ज्यादा कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में

बच्चा है अभी इसे ज्ञान नहीं है,

क्या है संगीत पहचान नहीं है,

गाली देके लाखो में खेल रहा है,

बच्चे को बुराई में ढकेल रहा है,

भजन कम शोर हैं ज्यादा,

कुछ तो रखो मर्यादा,

जो भी गाना है गाओ सुर में....

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।