किसी के काम जो आये उसे हिन्सान कहते हैं

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॥ पावन पाठ ॥

मंदिर में पूजा करो तीर्थ करो हज़ार

दिल में दया धरम नहीं, तो मनवा सब कुछ हैं बेकार

किसी के काम जो आये, उसे हिन्सान कहते हैं

पराया दर्द अपनाये, उसे हिन्सान कहते हैं

यह दुनियाँ एक उलझन है, कहीं धोखा कहीं ठोकर।

कोई हँस-हँस कर जीता है, कोई जीता है रो-रोकर॥

जो मुश्किल में ना गभराये, उसे इन्सान कहते हैं॥

अगर गलती रुलाती है, तो राहें भी दिखाती है।

मनुज गलती का पुतला है, तो अक्सर हो ही जाती है॥

जो कर ले ठीक गलती को, उसे इन्सान कहते हैं॥

यों भरने को तो दुनियाँ में, पशु भी पेट भरते हैं।

लिये इन्सान का दिल जो, वो नर परमार्थ करते हैं॥

पथिक जो बाँट कर खाये, उसे इन्सान कहते हैं॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।