दादा वेगो वेगो आजा रे भरतपुर का राजा रे

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - म्हारा खाटु का राजा रे ....

तेरा ध्यान हम तो धरे,

गुरुवर दिल से याद करे,

म्हाने दर्श दिखाजा रे

दादा बेगो बेगो आजा रे

है भरतपुर का राजा रे

दादा बेगो बेगो आजा रे

आ.. आ...ना.....

थारे दर्शन री लागी म्हाने प्यास

गुरुवर भक्ता ने बस थारी आस

आकर नेंणा में समाजा रे

दादा बेगो बेगो आजा रे

था बिन आवे न एक पल चेन

दिलबर याद करे दिन रेन

म्हाने धीर बँधाजा रे

दादा बेगो बेगो आजा रे

✍️ रचनाकार ✍️

दिलीपसिंह सिसोदिया

❤️ दिलबर ❤️

नागदा जक्शन म.प्र.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।