ऐसे कौन से कर्म करे जो साथ मिल जाए तेरा

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॥ पावन पाठ ॥

हे भगवान हम अज्ञान कैसे ध्यान करे तेरा

ऐसे कौन से कर्म करे जो साथ मिल जाए तेरा

ये दुनिया का मेला भटक मैं जाऊ न

राहे बहुत सी है कही खो जाऊ न,

हु अकेला उस भीड़ में दिल ये गबराए मेरा

ऐसे कौन से कर्म करे जो साथ मिल जाए तेरा

तुम से हो होती है सुबह और शाम यहाँ

तेरे बिन न होता ओई भी काम यहाँ

तेरे ही तो छाया में खिल जाए ये जीवन मेरा

ऐसे कौन से कर्म करे जो साथ मिल जाए तेरा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।