मेरे आस पास दिल में तुम रहते हो साईं

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॥ पावन पाठ ॥

मैं जहाँ जहाँ देखूं तुम दीखते हो साईं,

मेरे आस पास दिल में तुम रहते हो साईं,

घर बार तुम्हारा है संसार तुम्हारा है,

तुमने जो दिया है ये परिवार तुम्हारा है,

हर रिश्ते नाते में तुम बसते हो साईं,

मेरे आस पास दिल में तुम रहते हो साईं,

मैं जहाँ जहाँ देखूँ......

मेरी छोटी सी कुटिया मेरा छोटा सा घर है,

इस घर के अंदर भी एक छोटा सा मंदिर है,

मैं बड़भागी इसमें तुम रहते हो साईं,

मेरे आस पास दिल में......

शिरडी का गाँव तो बस ये एक बहाना है,

वैसे सारी दुनिया तेरा ठोर ठिकाना है,

दुःख दर्द सभी के तुम हर लेते हो साईं,

मेरे आस पास दिल में......

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।