कृष्ण की दीवानी बनकर

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कृष्ण की दीवानी बनकर, मीरा ने घर छोड़ दिया

इक राजा की बेटी ने गिर,धर से नाता जोड़ लिया ll

नाचे गाए, मीरा बाई, लेकर मन का इक तारा l

पग में घुंघरू, गले में माला, भेष योगन का है धारा l

राणा कुल की, आन-बान को ll, मीरा जी ने तोड़ दिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

भक्ति ज्ञान का, था इक तारा, हर घुँघरू में नाद भरा l

हरि गायण में, वसे कन्हैया, भक्ति भाव में स्वाद भरा l

ज्योति से ज्योत, मिला दी उसने ll, सबसे नाता तोड़ लिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

सास कहे, कुल नाशी मीरा, लगे गले में फाँसी रे l

कैसे जीना, होगा तेरा, जग करता है हाँसी रे l

मन के पिया की, बनी योगनियाँ ll,

और तन के पिया को छोड़ दिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

साँप पिटारा, राणा भेजा, हार मौत के शुलों का l

हँस करके, मीरा ने पहना, हार बन गया फूलों का l

प्रेम दीवानी, मीरा देखो ll, मोह का बंधन तोड़ दिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

पी गई मीरा, बाई देखो, राणा के विष का प्याला l

कौन बिगाड़, सका है उसका, जिसका गिरधर रखवाला l

गिरधर के रंग, में मीरा ने ll, जग से नाता तोड़ लिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

श्याम शरण में, जो कोई जाए, वो श्याम का बन जाता l

भक्त दयालु, भजन भाव में, मीरा के ही गुण गाता l

भव सागर से, तर गई मीरा, जग से बंधन तोड़ दिया,

कृष्ण की दीवानी बनकर,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

*जय जय राधे, जय जय राधे, xll-llll

हरे कृष्णा,,,धुन

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।