मारा घाट मा बिराजता

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहमुनाजी महाप्रभुजी,

मारु मांडू छे गोकुल वनारा वन,

मारा तन ना आंगनिया मा तुलसी ना वन,

मारा प्रान जीवन, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

मारा आतम न आंगने श्री महाकृष्णजी,

मारी आंखो दिश गिरधारी रे धारी,

मारू तनमन थायु जेने वैरी रे वैरी,

मारा श्याम मुरारी, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

मारा प्रान ठाकी माने वैष्णव वला,

नित्य कर्ता श्रीनाथजी न काल रे वाल,

मुझे तो वल्लभ प्रभुजी कीड़ा के दर्शन

मारू मोहि लिधु मन, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

हुन तो नित्य विट्ठलवर्णी सेवा करे,

हुन तो आथे सामा केरी झाँकी रे करुण,

मी टू चितदुन श्रीनाथजीने चारण धौर्युन

जीवन सफर करुण, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

मी टू भक्ति मरगा केर संगा रे साध्यो,

मुझको पुश्तैनी मारगा केरो संग रे साध्यो,

मने ढोड कीर्तन करे रंगा रे लाग्यो,

मी टू लालाणी लाली कीरो रंगा रे माग्यो,

हिरलो हाथा लाग्यो, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

ऐवो जीवन्मा लावो फ़री कादी ना नर,

वारिवरे मनव देहा कदे न नर,

फेरो लखारे चोरसिनो मारो रे फेड,

मने मोहन नर, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

मारी अन्ता समै केरी सुनो रे अरजी,

लेजो शरणो मां श्रीजी बाबा दया रे कारी,

मने तेदे रे यम केरा कदी ना आवे,

मरो नाथ तेदेव,

मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहमुनाजी महाप्रभुजी,

मारु मांडू छे गोकुल वानरा वन,

मारा तन ना आंगनिया मा तुलसी ना वन,

मारा प्रान जीवन, मारा घाट मा बिराजता,

श्रीनाथजी याहुमांजी महाप्रभुजी

श्रीनाथजी बोलो, श्री याहमुनाजी बोलो,

श्रीनाथजी बोलो, श्री याहमुनाजी बोलो,

श्रीनाथजी बोलो, श्री याहमुनाजी बोलो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।