दाता नहीं है श्री राम के जैसा

पारंपरिक
हनुमान जी भजन राम भजन hanuman
॥ पावन पाठ ॥

दाता नहीं है श्री राम के जैसा,

सेवक नहीं है हनुमान के जैसा,

आंख उठा कर देखा जग में सारा जगत भिखारी,

काम क्रोध मद लोह मोह में लिपटे सब नर नारी,

पाप नहीं कोई अभिमान के जैसा,

दाता नहीं है श्री राम के जैसा,

पड़ कर देखो रामायण बस एक ही बात सिखाये,

वो नर पार उतर जाए जो अपना फ़र्ज़ निभाए,

धर्म नहीं मानव सामान के जैसा,

दाता नहीं है श्री राम के जैसा

सुख चाहो तो सुमिरन करलो राम प्रभु का प्यारे,

संजू सबको जाना होगा इक दिन हाथ पसारे,

तप नहीं हरी गुणगान के जैसा,

दाता नहीं है श्री राम के जैसा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।