प्रेम की श्रधा बहाते चलो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

हनुमत के गुण गाते चलो प्रेम की शरदा वहाते चलो

राह में आये जो कोई दुखी किरपा सभी पे बहाते चलो

प्रेम की श्रधा बहाते चलो

सारी दुनिया ने ठुकराया द्वार पे अर्जी लगाया

चारो और अँधेरा छाया तब मैंने तुझको बुलाया

आशा के दीप जलाते चलो

किरपा सभी पे बहाते चलो

प्रेम की श्रधा बहाते चलो

भगतो के हो तुम प्रतिपाला संकट मोचन वाला

गल वैजयन्ती माला सुन्दर लाल लंगोटे वाला

सारे जग में है तेरा ही नाम

किरपा सभी पे बहाते चलो

प्रेम की श्रधा बहाते चलो

चारो और है सिर्फ निराशा केवल तेरा ही आशा

मैंने जब जब तुझको पुकारा तेरा शरण ही सहारा

ध्यान लगा के रटते चलो

किरपा सभी पे बहाते चलो

प्रेम की श्रधा बहाते चलो

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।