लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे

पारंपरिक
अन्य भजन बावा लाल दयाल भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे,

एसी रोनक ला दिति मिले स्वर्गा दे नजारे

लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे,

बच्चा बुढा बड़ा छोटा जयकारे लाल दे लावे

थकना की ऐ हर कोई भ्ज्दा भ्ज्दा जावे,

सब इको झुण्ड विच ही बावा लाल दा नाम पुकारे

लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे,

जीवे जीवे जी ध्यान पुर दा रस्ता कटदा जावे

भगता वलो लाये लंगर सब दे मन नु भावे

किते पुरियां छोले जी किते ने दूध दे नल छवारे,

लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे,

शेल्ली भी चल नाल संगत दे चाई चाई आया

गोरव ने तेरी पैदल यात्रा गा के सब नु सुनाया

सारी संगत नच उठी लाउंदी नाम तेरे दे जय कारे

लैके पैदल यात्रा जी चले ने लाल दे भगत प्यारे,

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।